प्रेम और जुड़ाव की गहराई ऐसी होती है कि उसमें हम अपने सच्चे अस्तित्व को पहचानते हैं। किसी और के अक्स में खुद को देखना, हमें यह समझाता है कि रिश्तों में अपनापन और भावनात्मक सहारा ही हमारी पहचान को निखारते है । खुद को पहचानना और अपनाना ही आत्म-सुख और सच्ची खुशी का रास्ता है। दूसरों की अपेक्षाओं के बजाय जब हम अपने अक्स को स्वीकारते हैं, तभी हम अपनी वास्तविक पहचान और आत्मविश्वास पा सकते हैं।
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