एक अनचाही उम्मीद की तरह इस दुनिया में आई, हर किसी की आँखों में खटकती, एक तो मैं माँ-बाप की उम्मीदों से परे लड़के के बदले लड़की जन्मी उपर से श्याम वर्ण मेरा स्वागत मुस्कुराहटों की महफ़िल ने नहीं किया नहीं, मातम ओर उदासीन वातावरण में पहली साँस भरी। आँख खोलते ही दर्द की सांवली ओर गमगीन परछाइयों ने मुझे अपने वजूद में समेट लिया और शुरू हो गया जद्दोजहद से भरा जीने का सफर, जीना तो पड़ेगा ही, पर वो सपना मुझे हौसला दे जाता था कि शायद कोई चमत्कार हो और मेरा सपना सच हो जाए और मैं भी अपनों की नज़रों में ऊँची उठ पाऊँ।
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