साथ

यह कविता सच्चे और निस्वार्थ साथ की भावनाओं को उकेरती है। इसमें जीवन के हर सुख-दुख, हर पड़ाव पर किसी अपने का हाथ थामने की अहमियत को दर्शाया गया है। कविता साथ की उस शक्ति का गुणगान करती है, जो हर मुश्किल को आसान बना देती है और हर क्षण को खास। यह शब्दों के जरिए एक ऐसे बंधन की परिभाषा देती है, जो बिना शर्त, बिना स्वार्थ जीवनभर बना रहता है।

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: विजय सांगा
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