क्षत-विक्षित भी हुआ सरहद पर मैं, पर कभी ग़म ना था, पर मेरी ही शहादत पर खेल सियासत ने खेला कम ना था। जी करता है लौट आऊं सरहद से, पर कर्तव्य में बंध जाता हूं भारत मां की आन के खातिर सीने पर भी गोली मैं खाता हूं।
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