कहानी एक जंगल की है, जहां राजा शेर अर्जुन सिंह ने वर्षों तक अपनी प्रजा के लिए न्यायपूर्ण और सख्त शासन किया। अर्जुन सिंह अपने आदर्शों और कर्तव्यों के प्रति समर्पित था। लेकिन गिद्ध कालकूट, लोमड़ी धूर्तिका और भेड़िया क्रूराख ने चालाकी से अर्जुन सिंह को जंगल से बाहर निकालकर खुद को राजा घोषित कर दिया। कालकूट का शासन क्रूर और अन्यायपूर्ण था। जंगल की प्रजा, जो कभी अर्जुन से डरती थी, अब कालकूट के अत्याचारों से त्रस्त हो गई। अर्जुन का बेटा विवान, जो अब युवा हो चुका था, अपने पिता के आदर्शों पर चलने की कोशिश करता है। विवान ने अपनी प्रजा को एकजुट किया और चुनाव का प्रस्ताव रखा, जिससे जंगल का असली शासक तय हो सके। कालकूट ने चुनाव को रोकने के लिए चालाकी और हिंसा का सहारा लिया, लेकिन जंगल की प्रजा ने एकजुट होकर उसका सामना किया। विवान ने निडर होकर नेतृत्व किया और गिद्धों के हमले को नाकाम कर दिया। अंततः कालकूट और उसके साथियों को जंगल छोड़कर भागना पड़ा। अर्जुन सिंह जंगल लौट आया और विवान को राजा घोषित कर दिया। विवान ने अपने पिता की तरह प्रजा के हित में शासन करने की शपथ ली। इस कहानी का अंत एकता, साहस और न्याय की जीत के साथ होता है, जो यह संदेश देता है कि जब लोग मिलकर अपने अधिकारों के लिए खड़े होते हैं, तो वे किसी भी अन्याय को हरा सकते हैं।
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