आँसू भी अब मानो रूठ गए, गम के बादल कहीं दूर छूट गए। जो दिल धड़कता था जज़्बातों से, आज बस धड़कता है मजबूरियों से।
1. पत्थर दिल 8 | 8 | 8 | 5 | | 21-12-2024 |
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