अनमोल और राधा ने एक शाम अपनी टॉर्च और खाने-पीने का सामान लेकर भूलभुलैया मैदान का रुख किया। वहां पहुंचने पर उन्हें घने पेड़ों के बीच एक पुरानी, टूटी-फूटी इमारत मिली। इमारत के अंदर अंधेरा था, लेकिन एक कमरे से नीली रोशनी निकल रही थी।
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