मेरा प्रिय मित्र

"दोस्ती का वो खजाना, जो वक्त की धूल में कहीं खो गया... लेकिन यादों की चादर से आज भी झांकता है।" रविवार की सुबह, अखबार का एक छोटा सा कोना— "गुमशुदा की तलाश", और रामेश्वर का दिल धक से रह गया। "ये चेहरा... कहीं देखा है!" एक खोए हुए दोस्त की कहानी, बचपन के बगीचों, बारिश की नावों, और शरारतों के झरोखों से होकर गुजरती है। कैसे किशन, रामेश्वर की जिंदगी का वो हिस्सा था, जो कभी भूला नहीं जा सकता। दोस्ती, बचपन की मासूमियत और जिंदगी के उतार-चढ़ाव को समेटे ये कहानी याद दिलाएगी कि सच्चे दोस्त कभी गुम नहीं होते— वो हमारी यादों में हमेशा जिंदा रहते हैं। "क्या रामेश्वर अपने दोस्त को फिर से पाएगा? या फिर ये कहानी सिर्फ यादों का एक अंश बनकर रह जाएगी?" "मेरा प्रिय मित्र— एक दोस्ती, जो वक्त के पार भी सांस लेती है।"

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: Writer Raj
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