अनछुआ एहसास

यह कविता उन भावनाओं को व्यक्त करती है, जिन्हें शब्दों में बाँध पाना कठिन होता है। यह कविता दिल के कोमल कोनों में बसे उन अनकहे और अदृश्य एहसासों की कहानी कहती है, जो बिन छुए भी जीवन को गहराई से छू जाते हैं। हवा के झोंके, पहली बारिश की बूंद, और हल्की धूप की तरह ये एहसास हमारी आत्मा को छूते हैं और हमें जीवन के अद्भुत पहलुओं से परिचित कराते हैं। कविता में प्रेम, प्रतीक्षा और आत्मीय जुड़ाव की झलक मिलती है, जो पाठकों को अपने भीतर के गहरे भावों को महसूस करने पर मजबूर करती है।

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: विजय सांगा
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