कविता "वक्त का बदलता चेहरा" में समय के साथ बदलती इंसानियत का चित्रण किया गया है। आधुनिकता और स्वार्थ की दौड़ में संवेदनाएं, रिश्ते, और इंसानियत पीछे छूट रही हैं। जहां पहले प्यार और दया का महत्व था, वहां अब नफरत और अकेलेपन ने जगह ले ली है। कवि इंसानियत को पुनर्जीवित करने और दया, प्यार, और सहानुभूति से समाज को सुधारने का आह्वान करता है।
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