वीरेंद्र और उसके दोस्तों ने दंडकवन की शांति भंग कर प्राचीन चेतावनी को नजरअंदाज किया। इससे गांव पर प्रकोप का साया छा गया, जहां फसलें सूखने लगीं और पानी जहरीला हो गया। अपनी गलती का एहसास होने पर वीरेंद्र ने प्रायश्चित का निर्णय लिया। अब उसे देवी को प्रसन्न कर गांव को बचाने की जिम्मेदारी उठानी होगी।
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