प्रकृति का प्रकोप

जिस धरती पर वो रह रहा है उसी को हरदम चोट पहुंचाने पर तुला रहता है, उसके गर्भ में छिपे रहस्यों को जानने का हरदम प्रयास करता रहता है जो कुछ इस धरती ने स्वयं दे दिया है उसमें उसे संतुष्टि नहीं मिलती वो और उसको अंदर से कुरेदता रहता है और फिर जब धरती उसके प्रहार से तंग आ जाती है तब वो अपना विकराल रूप दिखा ही देती है जिसमें भूकंप, बादल का फटना, सूखा, बाढ़ इत्यादि है

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: rani
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