किसी के जानें से ज़िंदगी नहीं रूकती। जब हम सोचते हैं, की सब ख़त्म हों गया। तब एक नई राह अपने आप सामने आ जाती है...!"
1. अंत ही शुरआत हैं। 4 | 2 | 24 | 5 | | |
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