हां बेटा..! इन बच्चों को मां की जरूरत है। बहुत संपन्न और अच्छा परिवार है इनका। बहुत सुखी रहोगी तुम।” ऋतु ने सर का दुपट्टा उतार फेंका और बिगड़ कर बोली, “तो आप ही चली जाओ ना इनकी देख भाल के लिए। मेरी बलि क्यों दे रही हो..?” इसके बाद बिना किसी की कोई बात सुने ऋतु सीधा कॉलेज निकल गई। आज वो खुद को अनाथ समझ रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे उसके माता पिता नहीं है इस दुनिया में।
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