लालच

जिसने खोया अपनी बेटी को, सुधर जा ए लालची इंसान, वरना भूल जा, अपने अस्तित्व को, जो सारे रिश्ते नाते तोड़, तुझको है अपना बनाती, फिर क्यों ए नादा,

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: Writer Dev
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