शक का बीज

“तुमको जब अपने बॉस को ही खुश करना था तो मुझे क्या अपना बॉडी गार्ड बना कर के लिए लाई थी..? मेरे माथे पर क्या बेवकूफ लिखा हुआ है..? तुम मेरी आंखों के सामने रंगरलियां मनाओगी और मेरी समझ में कुछ भी नहीं आएगा..? तुम्हारे प्यार में बेशक पागल हुआ हूं पर इतना भी नहीं कि कुछ समझ नहीं आए मुझे। रहो अपने इस नए यार के साथ आराम से मै जा रहा हूं..” इतना कह कर विनीत वहां से निकल गया। नेहा की आँखें भर आईं। उस ने विनीत को रोकने की कोशिश नहीं की। जब उसके दिल में शक का बीज पड़ गया है तो उसको रोकने से कोई फायदा नहीं है।

19 Views
Time : 17 Min

All Right Reserved

: निर्मेश
img