कर्तव्य

यह कविता "कर्तव्य" के गहन महत्व को उजागर करती है, जो प्रत्येक व्यक्ति के जीवन का आधार है। कविता जीवन के विभिन्न संघर्षों और चुनौतियों के बीच कर्तव्य के प्रति अडिग रहने की प्रेरणा देती है। इसमें कर्तव्य को धर्म, त्याग, और सत्य के साथ जोड़ा गया है, जो मानवता और आत्मा का सार है। यह पाठकों को अपने जीवन में कर्तव्य की लौ जलाए रखने और इसे पूरी निष्ठा से निभाने का संदेश देती है।

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: विजय सांगा
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