देश की सरहद पर तैनात सिपाही न सिर्फ अपने परिवार से दूर रहकर बलिदान देता है, बल्कि अपने प्राणों को हथेली पर रखकर मातृभूमि की रक्षा करता है। उसकी हर सांस, हर कदम तिरंगे और देश की आन-बान-शान के लिए है। कठिन परिस्थितियों में भी वह अडिग रहता है, चाहे बर्फीली ठंड हो या दुश्मनों की घातक साजिशें। यह कविता वीर सिपाहियों के साहस, देशभक्ति और त्याग को सलाम करती है और उनके बलिदान को अमर मानती है। उनके लिए देश की माटी ही सबसे बड़ा गौरव है, और उनके बलिदान से ही हमारा वतन सुरक्षित और गर्वित है।
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