सरहद

यह कविता "सरहद" उन भावनाओं की गूंज है, जो इंसानियत को सरहदों की दीवारों से ऊपर उठाने की पुकार करती है। यह न केवल सीमाओं के दर्द और बिछड़न को दर्शाती है, बल्कि एक ऐसी दुनिया का सपना दिखाती है, जहां दिलों में बसी नफरत मिट जाए और अमन का सूरज हर दिशा में चमके। प्रेम, शांति, और एकता के संदेश से भरपूर यह कविता पाठक के दिल को छूने और सोचने पर मजबूर करने का प्रयास करती है।

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दैनिक प्रतियोगिता

: विजय सांगा
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