सरहद

ले आई छत पे क्यों मुझे बेवक़्त की घुटन तेरी तो खैर बाम पे आने की उम्र है तुझसे बिछड़ के भी तुझे मिलता रहूँगा मैं मुझसे तवील मेरे जमाने की उम्र है

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कविता

: rani
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