जुदाई

छूने दो किरणों को चेहरा तेरा अब चेहरे से पर्दा उतारो तुम चाहता हूँ मोहब्ब्त बरसे यहाँ कुछ दिन मेरे शहर भी गुज़ारो तुम

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कविता

: rani
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