"हो सके तो भुला दो" एक संवेदनशील और दिल छू लेने वाली कविता है, जो बीते पलों, अधूरी यादों, और उन भावनाओं को अलविदा कहने की कोशिश करती है, जो अब सिर्फ स्मृतियों का हिस्सा बन चुकी हैं। यह कविता प्रेम, बिछड़न, और आत्ममुक्ति के गहरे भावों को छूते हुए पाठकों को जीवन के अनकहे पहलुओं पर विचार करने के लिए प्रेरित करती है। सरल शब्दों और गहरी भावनाओं से सजी यह रचना दिल और दिमाग दोनों को झकझोर देती है।
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