एक अनोखा सहयात्री

आपकी रूममेट हूं।’ उनके कहने पर मैं चौंक गया था। मेरे मुंह से निकला- ‘पर मैंने तो अकेले कमरे के लिए बोला था।’ ‘मैंने भी तो अकेले कमरे की मांग की थी।’ हम दोनों ग्रुप मैनेजर के पास गए, जिसने मुझे समझाया- ‘अंकल, अकेला-अकेला कमरा लेने पर आपको तीस हजार रुपए और देने होंगे। वैसे अगर आप दो सिंगल जेंट्ज वाला कमरा शेयर कर लें तो आपके जमा पैंसठ हजार में से कुछ रुपए हम वापस करेंगे… आंटी को हम अकेला कमरा दे देंगे।’

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कविता

: Writer Dev
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