आंसू जो गिरें, वो दास्तां बयां करते रहे, हर हंसी के पीछे ज़ख्म छुपे रहते रहे। इश्क़ मेरा कोई मज़ाक नहीं था, यारा, जमाना समझ न सका, और हम सहते रहे।
1. आंसुओं का तमाशा 13 | 11 | 13 | 5 | | 01-12-2024 |
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