ये कहानी हैं,,एक सीधी साधी लड़की माही की। माही का पूरा नाम माही शर्मा था। उसकी उम्र यहि 24 साल । दिखने में सादगी की मूर्त उसे सजने सवेरे का बिल्कुल शौक नहीं था। उसे सिंपल रहना और हाले रंग का कपड़े पहने पसंद था। पर उसकी असली खूबसूरती तो उसकी सादगी और हस्ती मुस्कराते उसकी मुस्कान हैं। माथे पर छोटी सी काली बिंदी, गुथे हुए बाल जो उसके कमर तक लटकते थे , आखों में हल्के काजल और हिंदुस्तान सलवार सूट कमाल लगती थी। ये कह लो वही उसकी पहचान थी। माही अपने माँ बाप की इकलौती बेटी थी। माँ तो उसके इस दुनिया में कदम रखते ही उसे छोड़कर चली गई। तब से माही के बाबा यानी राघव शर्मा ने ही उसे पाल पोषक कर बड़ा किया है। दोनों बाबा बेटी में दुनिया भर का प्यार था एक दूसरे के लिए। दोनों ही अपनी छोटे से परिवार में बहुत खुश रहा करते थे। पर तीन साल पहले सब बदल गया। जब माही के बाबा की कार एक्सीडेंट से एक पैर चली गई। माही ने अपनी पढ़ाई बीच में छोड दिया और अपने बाबा का कंधा बन गई। अपने लिए एक नौकरी खोजकर घर का पूरा जिम्मेदारी ले लिए एक बेटे की तरह और अपने बाबा की देख भाल करने लगी। कितने भी हालत बुरे हो माही ने कभी हार मानना नहीं सीखा था। पर कह्ते हैं जब मुसीबत आती हैं तो एक साथ एक मुसीबत आ जाती हैं। माही के साथ भी यैसा ही हुआ । किसी तरह अपने पुराने हादसे से उभरे ही थे ही 6 महीने पहले पता चला कि राघव शर्मा की एक किडनी फेल हो चुकी है और एक काम कर रहीं। पर आगे जा कर कब तक काम करे ये भी कहा नहीं जा सकता था। डॉक्टर ने भी उन्हें अच्छे हॉस्पिटल में जा कर किडनी ट्रांसप्लांट करवाने को कहा। माही के लिए इस दुनिया में उसके बाबा के सिवा कोई और नहीं था। रिश्तेदार ने तो पहले ही मदद के नाम पर उनसे मुंह मोड़ लिया था। इस लिए जो कुछ भी उनके पास था सब बेच बाच कर बेंगलुरु आ गई और बेंगलुरु के ही एक अच्छे सिटी हॉस्पिटल में अपने बाबा का एडमिट कर दिया । और खुद एक छोटे से कमरे को रेंट में लेकर वहॉं रहने लगी। यहाँ पर जब पता चला कि जितने पैसे उसके पास हैं वो तो उनके दवाई और हॉस्पिटल के रहने का खर्च में ही खत्म हो जाएगा । तब से ही इस बेंगलुरु जैसे शहर में खुद के लिए नौकरी की तलाश करने लगी। यहाँ जहाँ चाय के ठेले पर काम करने वाले के पास उसे जादा डिग्री थी तो उसे कौन नौकरी देता जब कि वो 12वीं पास थी। माही पढ़ाई में बहुत अच्छी थी पर हालत ही कुछ यैसे हुई कि MBA की पढ़ाई आधी ही छोड़ने पढ़ी। पर उसने कभी अपनी किस्मत से हार नहीं माना और छोटा हो या बड़ा काम । जहाँ उसे काम मिलता वो कर लेते उससे फिलहाल ऑपरेशन के लिए पैसा जमा करना जादा जरूरी हैं। और दूसरी तरफ विनय राणा । उम्र 27 साल ,गौरा रंग , तीखे नैन नक्श और साफ फीचर्स जिसे उसे हैंडसम करार देते हैं । विनय को शांति और परफेक्शन पसंद है। उसकी उसके पर्सनैलिटी भी वैसे ही थी। विनय राणा बेंगलुरु की टॉप कम्पनी ब्लैक स्काई का मालिक हैं और उसका सीईओ भी। विनय के पास शोहरत, रुतबा और पैसे की कोई कमी नहीं है। विनय राणा अपनी फॅमिली का बड़ा बेटा हैं। विनय की माँ भी उससे बचपन में ही उसे छोडकर भगवान के पास चली गई। विनय का उसे 3 साल छोटा एक भाई हैं जिसका नाम अनय राणा हैं और विनय के डैड का नाम अभिजीत राणा हैं। वो ब्लैक स्काई कंपनी के चेयर पर्सन हैं । विनय के डैड उसकी मम्मी के जाने के कुछ साल बाद ही दूसरी शादी कर ली और उनकी दो बेटियाँ भी हैं। ये दो अलग जिंदगियां माही और विनय जो एक दूसरे से बिल्कुल अलग हैं। जब एक दूसरे की जिंदगी में आयेगे एक "कॉन्ट्रैक्ट मैरेज " के सहारे। कैसा होगा इनका रिश्ता जानने के लिए जरूर पढ़ें " My Secret Wife" ।।
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