सेवानिवृत्ति (स्वैच्छिक ओपन)

वह अपने अतीत की उन स्मृतियों में खो गया, जब वह प्रतिदिन नौकरी से लौटकर आने के बाद अपनी पत्नी आरती से नौकरी के रोज़मर्रा के तनाव और नीरस जीवन की शिकायत करते हुए कहता था कि मैं अब इस नौकरी से तंग आ गया हूँ। जल्द ही स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले लूंगा। तब आरती हँसकर कहती कि एक दिन भी घर मे नहीं टिकोगे। इतनी व्यस्तता भरी जिंदगी से एकदम खाली हो जाओगे। कमोबेश यार दोस्त भी यही ताने मारते। रजनीश ने किसी की नहीं सुनी। अपने मन की ही करी।

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कविता

: rani
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