वो अपने हिसाब से भरसक प्रयास कर रहा था लेकिन वो अपने शरीर को हिला भी नहीं पा रहा था। ममी धीरे धीरे उसके करीब आती जा रही थी। जैसे ही उसने उसे मारने के लिए अपना हाथ उठाया आयुष एक तेज चीख के साथ उठ गया। वो घबरा कर अपने अगल बगल देखने लगा लेकिन उसे कोई नहीं दिखा। वो भाग कर सीधे अपने दोस्तों के कमरे के दरवाजे के पास गया और आवाज लगाते हुए दरवाजा पीटने लगा। फिर उन सब को इकठ्ठा कर के अपनी आपबीती बताई। उन सब को बिल्कुल हूबहू वैसा ही सपना आया था। जैसा कि आयुष को आया था। आयुष के सब दोस्त बहुत ज्यादा डरे हुए थे। उनमें से एक ने कहा,
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