बंदर और मदारी

"बंदर और मदारी" एक मनोरंजक और हँसी से भरपूर कविता है, जो गाँव की गलियों में होने वाले पारंपरिक तमाशों को जीवंत करती है। यह कविता मदारी और उसके बंदर की अद्भुत जुगलबंदी, उनकी नटखट हरकतों, और बच्चों के चहेते तमाशे का खूबसूरत चित्रण करती है। हास्य और सरलता से भरी यह रचना बचपन की मीठी यादों को ताजा करती है और हर पाठक के चेहरे पर मुस्कान बिखेर देती है।

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: विजय सांगा
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