राह का पत्थर राहों में पत्थर आएंगे, हर कदम पर आज़माएंगे, ये मुश्किलें, ये चुनौतियाँ, तुम्हें खुद से लड़ाएंगे। डर को हराना होगा, मन का विश्वास जगाना होगा, असफलता की अंधेरी रात में, उम्मीद का दीया जलाना होगा। धन की तंगी रोक नहीं सकती, सपनों को चुराने का दम नहीं रखती, संयम और हौसले से, हर दीवार को गिराना होगा। लोग कहेंगे, रोकेंगे, तुम पर सवाल उठाएंगे, अपने कर्म से उत्तर देना, वे खुद पीछे हट जाएंगे। अजनबी रास्तों पर चलना, धैर्य और साहस रखना, जो खो गए, वो मिल जाएंगे, बस खुद को थामे रखना। रिश्तों की कसौटी आएगी, दूरियाँ कुछ बढ़ाएगी, जो सच्चे हैं, वे साथ रहेंगे, हर मुश्किल संग निभाएगी। हर पत्थर को ठोकर मत समझो, ये सीढ़ियाँ बनते हैं, सपनों की ऊँचाई तक, यही तुम्हें चढ़ाते हैं। ज़िंदगी का ये सफर है खास, हर मुश्किल में है कुछ आस, चलते रहो, थमना मत, तुम्हारे हौसले का है ये इतिहास।
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