सोलहवां सावन

विनीत ..! बहुत दिन हो गए हम सात कहीं गए नहीं हैं। चलो आज मेरे साथ कैफे में मुझे तुमसे कुछ बहुत जरूरी बात भी करनी है।” विनीत उसकी ओर देखे बिना ही बोला, “कंचन..! अभी तो एग्जाम चल रहा है। अभी पॉसिबल नहीं है कहीं चलना। अभी क्या.. मुझे तो लगता है अब संभव नहीं होगा घूमना फिरना क्योंकि हमारा अब ट्वेल्थ शुरू हो जाएगा। तुम भी पढ़ाई करो और मुझे भी पढ़ाई करने दो।” इतना कह कर विनीत तेजी से अपनी बाइक स्टार्ट कर के चला गया। उससे लिफ्ट के लिए भी नहीं पूछा। विनीत की बेरुखी से कंचन की आँखें छलक आई। वो भारी कदमों से अपने घर की ओर चल दी।

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: निर्मेश
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