माँ की गोद...!

यह कविता एक नवविवाहित बेटी की भावनाओं को व्यक्त करती है, जो शादी के बाद अपनी मां की ममता और गोद को याद करती है। ससुराल की जिम्मेदारियों के बीच, वह बचपन के पलों, मां की देखभाल, और उसके स्नेह को तहेदिल से याद करती है। मां की गोद को वह सुकून और सुरक्षा का प्रतीक मानती है, जिसे वह फिर से पाना चाहती है।

15 Views
Time : 1 Min

All Right Reserved

लेखक : Aayu
img