अनकहा दर्द

दिल का दर्द जो जुबां तक न आ सका, आँखों की नमी में ही बहता रहा। कहने को तो बहुत कुछ था दिल में, पर हर लफ्ज़ खामोशी में ही सिमटता रहा।

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