अपने उन दर्दों को, जो आपके अपनों से ही मिलते हैं। मान मर्यादा प्रतिष्ठा की खातिर, समाज में इज्जत की खातिर, सब कुछ खामोशी से सहते हैं। अपनी पीड़ा को समेट कर,
1. अनकहा दर्द 18 | 13 | 17 | 5 | | 21-11-2024 |
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