अंजाना सफ़र और काँटों भरी रहे निगाहों में समाया है दर्द का सैलाब एक अनकहा दर्द फिर उभर आया होंठो पे दर्द भरी मुस्कान है छाई
1. अनकहा दर्द 15 | 11 | 12 | 5 | | 21-11-2024 |
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