जादुई फूल

, “मधु..! धन्यवाद तुमने मुझे तोड़ा नहीं। मुझे चोट नहीं पहुंचाई। काश .. तुमने मेरे भाई को भी नहीं तोड़ा होता। हम चमत्कारी फूल हैं। हम कभी नहीं मुरझाते हैं। जो हमें सहला कर अपनी परेशानी बताता है। हमारे सामने अपनी विश व्यक्त करता है। हम उसकी वो सारी इच्छा पूरी कर देते हैं। पर तुमने मेरे भाई को तोड़ कर बहुत बुरा किया। मैं अकेला हो गया। अगर वो भी होता तो हम अब तक ना जाने कितने परेशान लोगों का दुख मिटा चुके होते।” मधु को बहुत पश्चाताप हुआ अपनी गलती पर। उसने हाथ जोड़ कर फूल से अपनी गलती के लिए छमा मांगी।

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: निर्मेश
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