हर बात कह पाना मुश्किल होता है दर्द बयां कर पाना आसा नहीं ,, अक्सर कुछ दास्ता अधुरी होती हैं अनकही यही दास्ता कितनो कि मजबूरी होती हैं राज गहरे है कितने समझना मुमकिन नहीं हर लफ्ज़ सच्चा हो ज़रूरी नहीं अक्सर अपने ही कारण होते हैं अनकही कहानी के खलनायक होते हैं
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