रो रही हैं अखियाँ मेरी

रो रही हैं अखियाँ मेरी देख तेरा हाल क्यों होती हैं दुर्गति नारी की यू बारंबार, सोचो समझो जानो तुम भी नारी का दर्द महान

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लेखक : A Rai anu
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