वो पल

शादी के बाद से मैं उसके अंदर बहुत परिवर्तन महसूस कर रहा था। उसकी आंखों में मुझे कुछ महसूस होता । मेरा भी मन अब उसके साथ रहने का करता । हम घंटों आम के बाग में बैठे अपने अपने स्कूल की बातें किया करते मेरे पास ज्यादा कुछ कहने को नहीं होता था बस उसकी बातों में खोया उसे निहारता रहता।बीच बीच में उसे अमिया खाने का मन करता ,पहले तो मैं चाचा जी के आदेश के अनुसार उसकी बातों को मानता था पर अब मैं खुद ही उसकी इच्छा पूरी करना चाहता । दौड़ के घर जाता चाकू प्लेट नमक मिर्ची लेकर आता । वो बोलती पेड़ पर ऊंगली दिखाकर वो अमिया तोड़ो मुझे वहीं खानी है। मैं झट पेड़ पर चढ़ जाता और तोड़ लाता। चाकू से छीलकर उसके टुकड़े कर दे रहा था और वो मज़े ले ले कर खा रही थी।

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: निर्मेश
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