कल से ऑफिस में फ्रेशरस का ट्रेंनिंग प्रोग्राम स्टार्ट हो रहा है जिसे शोभना कंडक्ट करेगी इस ट्रेनिंग सेशन में शोभना का भी लेक्चर होता हैं। कल से पन्द्रह दिन बहुत थकावट भरे होने वाले है ऑफिस के काम के साथ ट्रेनिंग सेशन और लेक्चर। आज रात जितना जल्दी बिस्तर पर आ लेटी है नींद उसकी आँखो से कोसों दूर है और चाह कर भी वह नींद की गोली नहीं ले सकती कि कहीं ऐसा न हो सुबह नींद न खुली तो या गोली खाने के बाद भी नींद अच्छे से नहीं आयी तो दिन भर भारीपन रहेगा। इसलिए नींद की गोली खाने का रिस्क भी नही ले सकती हैं। तो उसने बिस्तर पर ही करवट बदलना ही सही समझा और मन को दिलासा दिया कि अभी थोड़ी देर में नींद आ जाएगी। करवट बदलते हुए एक बज गए पर आज शोभना की आँखों का रास्ता शायद नींद भूल गयी थी। थक - हार कर उसने मोबाइल उठाना ही सही समझा और मोबाइल ले फ़ेसबुक और व्हाट्सअप देखने लगी मोबाइल देखते-देखते कब नींद आ गयी पता नहीं चला मोबाइल के अलार्म बजने के साथ ही शोभना की नींद खुली। सुबह जल्दी उठ नहा -धो कर पूजा-पाठ किया फिर अपने लिए नाश्ता- खाना बनाया तब तक कामवाली बाई भी आ गयी उसने जब तक काम खत्म किया तब तक शोभना ने नाश्ता खाकर और लंच पैक कर के आफिस के लिए रेडी हो गयी। उधर घर से काम वाली बाई गयी इधर दो मिनट बाद शोभना भी घर लॉक कर कार में आ बैठी। मन ही मन सोच रही थीं कि चलो घर से तो टाइम से निकल गए अब रास्ते में कही ट्रैफिक न मिले बस टाइम से ऑफिस पहुँच जाऊं। तभी उसके मोबाइल की घंटी बजी उसने पर्स से मोबाइल निकाल के देखा तो आभा का कॉल था शोभना ने कॉल पिक की उधर से आभा बोली यार शोभना आज मुझे ऑफिस आने में लेट हो जाएगा प्लीज तुम सब संभाल लेना। आभा बोली में जल्दी ही तुम लोगो को ज्वाँइन करने की कोशिश करूँगी। शोभना ने कहा ठीक है पर जल्दी आना। शोभना मन ही मन आज का शिड्यूल तैयार करने लगी तभी ड्राइवर ने ऑफिस के सामने लाकर गाड़ी को रोका तभी अचानक शोभना का ध्यान टूटा और वह झट से उतर कर आफिस के अंदर चली गयी। शोभना अपने केबिन में जा कर घंटी बजा कर चपरासी को कॉफ़ी लाने को बोलती है और जल्दी से कंप्यूटर ऑन कर काम में लग जाती है। कॉफ़ी के आखिरी घूँट के साथ उसे एहसास होता है कि कोई केबिन के बाहर से उसे देख रहा है फिर वह उससे नज़रे न मिलाते हुए उसकी ओर देखती है और फिर काम में मशगूल हो जाती है। थोड़ी ही देर बाद चपरासी आ कर बाहर से नॉक करता है और बताता है कि ट्रेनिंग क्लास से उनका बुलावा आया है और वह शीघ्रता से काम बंद कर क्लास रूम की ओर जाती है। क्लास रूम में जाते ही उन्हें एक ऑफिसर सोफे की ओर बैठने का इशारा करते है और शोभना बैठ जाती है थोड़ी ही देर में शोभना को फ्रेशर्स से इंट्रोड्यूस कराया जाता हैं फिर शोभना अपना काम संभाल लेती है। करीब डेढ़ घंटे के सेशन के बाद शोभना अपना लेक्चर खत्म करती है और टी ब्रेक होता है तभी शोभना भी कॉफी लेने के लिए बाहर निकलती है कि दुबारा उसका सामना सुबह वाले इंसान से होता है इस बार दोनो आपस में टकराते हुए बचे थे। शोभना सॉरी कहते हुए आगे बढ़ने की कोशिश कर ही रही थी कि पीछे से आवाज़ आयी शोभना मुझे पहचाना नहीं अचानक शोभना पलटती है और कहती है नहीं आप कौन उधर से जवाब आता है मैं सिद्धार्थ। मुझे नहीं पहचाना तभी चौक़ कर उसकी तरफ देखती है और कहती है अरे आप तो बिल्कुल बदल गए सिद्धार्थ जी मैं तो बिल्कुल पहचान ही नहीं पायी। आप यहां कैसे आइये केबिन में चलते है और हाथ का इशारा कर अपने केबिन की ओर बढ़ती है। सिद्धार्थ शोभना के व्यवहार से थोड़ा अचम्भे में था और शोभना के केबिन में पहुँच कर क्या हुआ शोभना तुम मुझे आप और सिद्धार्थ जी बोल रही हो अरे भूल गयी क्या मुझे। शोभना गुस्से से- कुछ नहीं भूली सिद्धार्थ आज कुल अठारह साल सात महीने छब्बीस दिन ही हुए है। कैसे भूल सकती हूं तुम्हारा धोखा पहचान तो सुबह ही गयी थी जब तुम मुझे स्टॉक कर रहे थे पर तुम्हें अवॉयड कर रही थीं पर जब सामने ही आ गए तो क्या करती। यहां क्या कर रहे हो? एक तरफ सिद्धार्थ उसके साल, महीने और दिन के आंकड़ों से अचंभित था तो वही दूसरी ओर उसके रूखे व्यहार से आश्चर्यचकित था। उसे समझ न आया कि वह क्या बोले और उसने सीधे से शोभना से पूछा कैसी हो तुम? जिसका बिना कोई उत्तर दिए सिर्फ घूर कर उत्तर मिला सिद्धार्थ को। आगे कुछ पूछने की हिम्मत जुटा ही रह था कि शोभना बोली कितने बेशर्म हो एक तो मेरे सामने आने की हिम्मत की फिर मुझसे मिलने की और बात करने की अब हाल पूछ रहे हो शर्म नही आती। जब छोड़ कर गए थे तब शादी का मंडप सज़ा था मेरे घर पर सब बारात का इंतज़ार कर रहे थे मैं दुल्हन बनी बैठी थी। उस दिन न बारात आयी न डोली गयी टूटे तो मेरे अरमान, मेरा दिल, मेरा विश्वास जो तुम पर किया था और समाज के सामने मेरे माँ-बाप की इज़्ज़त खराब हुई। अब अठारह साल बाद अचानक सामने आ कर मेरे हाल पूछने का क्या मतलब तब कहाँ थे सिद्धार्थ जब उस एक दिन में मैंने तुम्हारे फ़ोन पर हजारों कॉल की थीं और तूने एक भी कॉल उठा कर बात करना ज़रूरी नही समझा तू तब कहाँ था जब मैं शादी के जोड़े में सजी तेरे घर के दरवाजे पर खड़ी थीं और तूने नौकर से कहलवा दिया कि तुम घर पर नहीं जब कि तुम घर पर ही थे ऐसे बहुत से सवाल है सिद्धार्थ जिसका जवाब तब तुम्हारे पास नही था शायद आज है पर अब उन जवाबो का कोई मतलब नहीं। तभी अचानक सिद्धार्थ कहता है कहाँ खो गयी तब शोभना को एहसास होता है वह ऐसा सिर्फ सोच रही थीं और कहती है नहीं कही तो नहीं तब सिद्धार्थ कहता है तुम बिल्कुल भी नहीं बदली तब शोभना कहती है वक़्त और हालात बहुत कुछ बदल देता है फिर काफी साल भी हो चुके है सिद्धार्थ कहता है हाँ वह तो है तभी शोभना कहती है यहाँ कैसे आना हुआ तब सिद्धार्थ बताता है कि उसकी कंपनी ने उसका ट्रांसफर इस शहर में किया इसी बिल्डिंग में मेरा भी ऑफिस है सुबह तुम्हें ऑफिस आते देखा तो सोचा तुम से मिल लूँ। शोभना ने बात को काटते हुए क्या कॉफी पीएंगे आप? और जवाब सुने बगैर दो कॉफ़ी आर्डर कर दी। शोभना पुरानी कोई भी बात या जिक्र नहीं करना चाहती थी। शोभना आगे बात बढ़ाती हुई कहती है आज मेरा फ्रेशर्स क्लास है इसलिए थोड़ा बिजी हूँ सॉरी आपको टाइम नही दे पाऊँगी सब मेरा इंतज़ार करें मुझे पसंद नही हैं न मैं किसी का इंतजार करती हूं न इंतज़ार करवाती हूँ और हाँ कॉफ़ी आर्डर की पी कर जाइयेगा। अब दुबारा कभी भी मेरे ऑफिस या मेरे रास्ते में आने की हिम्मत मत करियेगा। यह कह कर बिना कुछ सुने तेज़ी से अपने केबिन से बाहर आती हैं। मन ही मन शोभना बहुत खुश होती है कही न कहीं सिद्धार्थ को ऐसे छोड़ कर जाने से उसको संतुष्टि मिली जिसकी खुशी को वह बयान नहीं कर सकती हैं। शोभना अब सिद्धार्थ से अतीत की कोई भी बात नहीं करना चाहती थीं क्योंकि अब उन बातों के लिए उसके पास न तो समय था न ही कोई दिलचस्पी। शोभना अब आगे बढ़ चुकी अपनी ज़िंदगी खुद से जीना सीख गई थीं। अब उसे किसी का इंतजार करना भी पसंद नहीं है क्योंकि इंतज़ार उसे कही न कहीं अठारह साल पीछे ले जाता है जहां वह कभी भी लौटना नहीं चाहती थीं। उधर सिद्धार्थ शोभना का यह बदला हुआ रूप देख कर अचंभित था वह अपनी उस दिन की हरकत के लिए माफी ही मांगने के लिए आया था पर शोभना ने कोई मौका ही नही दिया। क्योंकि अब पछतावे का समय निकल चुका था बहुत देर हो चुकी थीं अब उसको देने के लिए शोभना के पास कुछ भी नहीं था शायद माफी भी नहीं।
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