यह कविता पेड़ की छांव को माँ की ममता से तुलना करती है, जो हर किसी को सुकून और ठंडक देती है। पेड़ बिना भेदभाव के सभी को अपनी छाया में आराम देता है और निस्वार्थ सेवा का प्रतीक है। इसे संजोकर रखना हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए जरूरी है।
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