मिलन की आस

"मिलन की आस" यह कविता एक प्रेमी के दिल में बसी उस मीठी तड़प को बयाँ करती है, जो अपने प्रिय से मिलने की आस में हर पल जीता है। भावनाओं की इस यात्रा में, प्रेमी अपने मिलन के सपने सजाते हुए, उनके बीच की दूरी को मिटाने की इच्छा रखता है। यह एक पवित्र प्रेम की अनमोल अभिव्यक्ति है, जहाँ हर पंक्ति में सच्चे मिलन की गहरी चाहत झलकती है।

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: विजय सांगा
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