रात की तन्हाई में उसकी यादों का आलम है, चांद की तरह खामोश, मगर दिल में सलामत है। चांद सी महबूबा हो मेरी, जो हर लम्हा साथ हो, उसके साथ बिताए हर पल की अपनी एक बात हो।
1. चांद सी महबूबा हो 19 | 13 | 14 | 5 | | 10-11-2024 |
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