बाल विवाह की छाया

कहानी एक छोटी लड़की कुसुम की है, जिसे बाल विवाह की परंपरा के खिलाफ लड़ते हुए अपने सपनों को पूरा करने की प्रेरणा मिलती है। शादी से इनकार करके वह गाँव के लोगों को जागरूक करती है और पढ़ाई की ओर कदम बढ़ाती है। गुरुजी के मार्गदर्शन और परिवार के समर्थन से कुसुम आगे बढ़ती है और डॉक्टर बनकर गाँव लौटती है। उसकी सफलता गाँव के लिए प्रेरणा बन जाती है, जो बाल विवाह और शिक्षा के महत्व पर समाज को एक नई सोच देती है।........

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