पिता

बिना कहे कुछ अलग सा अहसास हो जाता है, अल्फाज़ जो जीवन मंत्र को सिद्ध कर देते है । छोटी छोटी सिकायतो को , हमने पूरा करते देखा है , मैंने अपने पिता को मुश्किलों में मुस्कुराते देखा है । अपने बीते को याद कर , थोड़ा हंसते हुए , मैंने उनकी आंखों में सुकून के पल को देखा है । दर्द होते हुए , होठों को  सीए हुए , मैंने उनको अल्फाज़ कम करते हुए देखा है ।       ज़िंदगी इतनी छोटी , तजुर्बा कई बरसों का              अपनो का लगाव ,कुछ अलग ही तनाव ,                   अपनो का धोखा , जो सबक से  सीखा                             हर उन इंसान का विश्वास ,                                       मैंने उनके चेहरे पर देखा है ,             हां मैंने उनको  अकेले खुद से बाते करते देखा है ,             हमारे बचपन मे ,उनको वापस बड़ा होते देखा है ,          हां हमने अपनी आंखो  में उनका सपना बड़ा होते देखा है , नहीं बोलते एक लफ्ज़ , नहीं जहीर करते है वो प्यार , हजारों खुशियों से भरते है ,वो हमरे बचपन के सिक्को के ज़ार, अकेले में मैने उनके सिकंज भरे माथ, अपने मां को गले लगाए, खिलकारियो में उनके बचपन को देखा है । मां,मां कह कर अपने भूली , बिसरी यादें ताजा करते देखा है , हां मैंने अपने पिता को ,इन सब उलझनों से गुजरते देखा है  ।                     

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: Cold heart
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