यह कहानी उस प्रथम छठ पूजा की है, जो सीता जी ने राम के साथ अयोध्या में की। इस विशेष अवसर पर सीता जी ने कठिन उपवास रखकर सूर्य देव की आराधना की और उनकी भक्ति, आस्था, और निष्ठा ने पूरे अयोध्या वासियों को प्रभावित किया। संध्या अर्घ्य और रात के जागरण के बाद, सीता जी ने प्रातःकालीन अर्घ्य देकर सूर्य देव को अर्पित किया, जिससे एक नई परंपरा की शुरुआत हुई। उन्होंने अयोध्या की महिलाओं को निष्ठा और समर्पण का महत्व समझाया, और इस पर्व के माध्यम से सभी के जीवन में आस्था की शक्ति जगाई। उनका यह छठ पूजा न केवल धार्मिक अनुष्ठान था, बल्कि एक प्रेरणादायक संदेश भी था, जिसने अयोध्या वासियों के हृदय में एक नई श्रद्धा की लौ प्रज्वलित की।
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