बचपन का स्कूल

यह कविता बचपन के स्कूल की प्यारी यादों को संजोए हुए है, जहाँ हर दिन दोस्ती, मस्ती और मासूमियत से भरा होता था। स्कूल का मैदान, टीचर का प्यार और दोस्तों के संग बिताए पल – इन सभी पलों को कविता में सजीव किया गया है। "बचपन का स्कूल" हमें उस समय की खुशियों और अनमोल अनुभवों की झलक देता है, जो हमेशा दिल में बसे रहते हैं।

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: विजय सांगा
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