यह कविता "वक्त की चाल" समय की अनोखी प्रकृति और इसके अटल प्रवाह को दर्शाती है। यह हमें बताती है कि वक्त कैसे बिना रुके हर किसी की ज़िंदगी को बदलता है—कभी खुशियों की बौछार तो कभी चुनौतियों की झलक दिखाता है। इसके साथ चलने वाले ही इसके असली मायने समझ पाते हैं और अपनी मंज़िल की ओर बढ़ते हैं।
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