बेदर्द दुनिया का ये अजीब दस्तूर है, हर शख्स यहाँ अपने में ही मशरूफ है। कोई पूछे ज़ख्मों की कीमत तो क्या बताएं, हर दर्द का सौदा यहाँ फर्ज़ की धूल है।
1. बेदर्द ज़माना 15 | 13 | 15 | 5 | | 29-10-2024 |
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