एक मीठी सी उलझन (इश्क की)

ये उलझन भी अजीब है, सुकून में बेचैनी भरती है, हर बार जब सोचूँ उसे, दिल की गहराई में उतरती है। समझने चले तो दिल और उलझ जाता है, ये इश्क़ की मिठास है, जो बस यूँ ही बहलाता है।

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