पंडित जी का स्मार्टफोन अनुभव

यह कहानी है हमारे गांव के सबसे ज्ञानी और सम्मानित पंडित जी की, जिनकी पंडिताई और विद्वता दूर-दूर तक मशहूर थी। गांव में कोई भी शादी-विवाह हो, नामकरण हो, या फिर कोई अन्य धार्मिक काम—पंडित जी की मौजूदगी अनिवार्य होती थी। लेकिन पंडित जी ने अब तक जिस चीज़ से दूरी बनाए रखी थी, वह थी ‘स्मार्टफोन’। गांव के सभी लोग अब तक स्मार्टफोन के दीवाने हो गए थे, लेकिन पंडित जी हमेशा अपनी पुरानी घड़ी और पंचांग के भरोसे ही चलते थे। "स्मार्टफोन? अरे, ये सब फालतू की चीजें हैं," पंडित जी अक्सर कहा करते, "हमारे लिए पंचांग और घड़ी ही काफी है।" लेकिन वक़्त ने करवट ली और पंडित जी के जीवन में भी स्मार्टफोन का प्रवेश हुआ। और यहीं से शुरू होती है इस हास्य से भरपूर कहानी

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: दिल से दिल तक
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